दहेज एक अभिशाप।
विवाह के समय कन्या पक्ष द्वारा वर को जो भेंट दी जाती है उसे दहेज कहते हैं। प्रश्न यह उठता है कि दहेज को बुराई क्यों कहा जाता है। विवाह के समय प्रेम का उपहार देना बुराई कैसे है, क्या एक पिता अपनी कन्या को खाली हाथ विदा कर दे, नही, वह अपनी प्यारी बेटी के लिये धन, वस्त्र आदि देना प्रेम का प्रतीक मानता है। परन्तु यह भेट प्रेम वश देनी चाहिये मजबूरी में नहीं। दुर्भाग्य से आजकल दहेज की हद यहाँ तक बढ़ गई है कि दुल्हों के भाव लगते हैं, जो जितना देगा वह शिक्षित होगा उसका भाव उतना ही तेज होगा। आज डॉक्टर, इंजिनियर का भाव चार-पाँच लाख, आई.ए.एस का बीस-तीस लाख, प्रोफेसर का तीन-चार लाख है।
विवाह के समय कन्या पक्ष द्वारा वर को जो भेंट दी जाती है उसे दहेज कहते हैं। प्रश्न यह उठता है कि दहेज को बुराई क्यों कहा जाता है। विवाह के समय प्रेम का उपहार देना बुराई कैसे है, क्या एक पिता अपनी कन्या को खाली हाथ विदा कर दे, नही, वह अपनी प्यारी बेटी के लिये धन, वस्त्र आदि देना प्रेम का प्रतीक मानता है। परन्तु यह भेट प्रेम वश देनी चाहिये मजबूरी में नहीं। दुर्भाग्य से आजकल दहेज की हद यहाँ तक बढ़ गई है कि दुल्हों के भाव लगते हैं, जो जितना देगा वह शिक्षित होगा उसका भाव उतना ही तेज होगा। आज डॉक्टर, इंजिनियर का भाव चार-पाँच लाख, आई.ए.एस का बीस-तीस लाख, प्रोफेसर का तीन-चार लाख है। ऐसे में कन्या का पिता कहाँ से पैसा लाये। वह दहेज मण्डी में योग्यतम वर खरिदने के लिये धन कहाँ से लाये बस यही से यह बुराई शुरू होती है। दहेज प्रथा के दुष्परिणाम विभिन्न हैं या तो कन्या के पिता को लाखों का दहेज देने के लिए घूस, रिश्वत, कालाबाजारी आदी का सहारा लेना पढ़ता है या उसकी कन्याएँ अयोग्य वरों से बांध दी जाती हैं। हम प्रायः समाचार पत्रों में पढ़ते हैं किसी बहू को ससुराल वालों ने जलाकर मार डाला किसी ने छत से कूदकर आत्महत्या की यह सब घिनौने अपराध, दहेज रूपी दैत्य की है। दहेज प्रथा रोकने के लिये समाज में संस्थायें तो बनी है किन्तू समस्या ज्यों कि त्यों है। सरकार ने दहेज निषेध कानुन के नियम के अंतर्गत दहेज के दोषी को कडा़ दण्ड देने का विधान रखा है। परन्तु वास्तव में आवश्यक्ता है जन जाग्रिति की जब तक युवक दहेज का बिहिष्कार नही करेंगे और युवतियाँ दहेज-लोभी युवको का तिरस्कार नहीं करेगी तब तक यह खेल चलता रहेगा।
(बबीता)