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अपहरण

This story is of a doctor whose son was kidnapped and but was later rescued by active policemen and aware neighbours.

मार्च 2005 को एक गम भरी शाम जब शाहबाद डेरी निवासी डा. मनोहर के पुत्र का  अपहरण हुआ। पेशे से डाँक्टर, मनोहर एक शाम को अपने क्लिनिक में अपने मरीजों के बीच व्यस्त थे। उसी बीच उसकी पत्नी शाम 5-6 बजे के करीब बाजार से सब्जी लेने गई थी। घर में उसकी एक आठ साल की बेटी व ढ़ेड़ साल का बेटा था। मौका पाकर अपहरणकर्ता उस बच्चे को डाँक्टर की बेटी से छीनकर ले गया। इस बात की खबर जब घर वालों को पता चली तो उन्होंनें बच्चे की खोज बीन शुरू की। इस घटना की खबर पूरी शाहबाद डेरी में जंगल की आग की तरह फैल गई। लोग इक्टठे होने लगे जब बच्चे का कहीं पता नही चला तो तरह-तरह की बातें होने लगी और अपहरण की वारदात से पूरी शाहबाद डेरी सन्न रह गई। इस बात की खबर क्षेत्रिय विधायक कुलवन्त राणा और उसके सहयोगी जिन्दल तक पहुँची। सभी लोग आनन-फानन में आ गये तथा स्थानिय पुलिस चौकी में सूचना दी गई। पुलिस को सूचना मिलते ही कार्यवाही करने के लिये टीम गठित की गई तथा खोजबीन शुरू हुई।

करीब 24घंटे में पुलिस के जाँबाज जवानों ने जनसहयोग व अपनी चुस्ती-फुर्ती व सूझ-बूझ का परिचय देते हुए दिल्ली के उत्तम नगर इलाके के एक छोटे से अज्ञात स्थान से अपहरणकर्ता सहित बच्चे को सुरक्षित खोज निकला। अपहरणकर्ता कोई और नही डा. मनोहर का नजदीकी रिश्तेदार निकला, जो कुछ महीने पूर्व उत्तर प्रदेश रोजी-रोटी की तलाश में आया था पर उसको मन-माफिक काम नहीं मिला। इसी बीच उसको एक ऐसे दंपती से परिचय हुआ जो निःसन्तान थे। उसने उनसे बच्चे का सौदा 40,000 रूपय़ों में कर लिया। 40,000 रूपऐ के लालच में पड़कर अपहरणकर्ता ने अपने रिश्तेदार का अपहरण कर लिया पर भगवान की कृपा व पुलिस प्रशासन की मदद से उस बच्चे को सकुशल बचाया जा सका।


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