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You are here: Home कहानियाँ (Stories) नई दिल्ली (New Delhi) अन्य मेरी अभिलाषा

मेरी अभिलाषा

Here a girl was expressing her feelings that she want to keep her past saved in her hands because her past was full of delighted memories. But she is very nervous about her future.

आज मैं अपनी उम्र के ऐसे पड़ाव पर खडी़ हूँ जहाँ एक ओर मेरा बचपन है, अतीत की यादें हैं तो दूसरी ओर मेरा भविष्य। मेरे अतीत में सब कुछ तो है- सुख-दुख, ईर्ष्या, उल्लास में अपनी अतीत की यादों को अपनी मुठ्ठी से बांधे रखना चाहती हूँ। पर ये अतीत कि यादें मेरी मुट्ठी से रेत की तरह फिसलती जा रही है और मेरा भविष्य विकराल काल की तरह मुझे निगलने को तैयार खडा़ है। मैं आगे बढ़ जाना चाहती हूँ ताकि जिस तरह मेरा अतीत सुन्दर है उसी तरह मेरा भविष्य भी सुन्दर व सुखमय बन पड़े। आज मुझे मुंशी प्रेमचन्द की उक्ति बहुत याद आ रही है - मै चढ़ना चाहता था, पहाड़ पर। पाँव में अष्टधातू की जंजीर थी।      

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