दोस्त बनी दुश्मन (आप-बीती)
एक बार मेरी एक सहेली एक जो कि मेरी अच्छी मित्र थी वह मेरे साथ ऑफिस मे काम करती थी। एक दिन वह लंच टाईम पर हमारे धर आई, उस वक्त हमारे घर पर मेरी मम्मी और मेरे सिवाय कोई नही था।
एक बार मेरी एक सहेली एक जो कि मेरी अच्छी मित्र थी वह मेरे साथ ऑफिस मे काम करती थी। एक दिन वह लंच टाईम पर हमारे धर आई, उस वक्त हमारे घर पर मेरी मम्मी और मेरे सिवाय कोई नही था। वह हमारे घर आई और मेरा पर्स चोरी करके ले गई जिसमे मेरा ऐ.टी.एम कार्ड और 1000 रूपेय थे। जब मैने उससे पूछा कि तुमने मेरा पर्स चोरी किया है तो उसने मना कर दिया और कहने लगी कि मैं मानती हूँ कि तेरा पर्स चोरी हुआ है तो मैं आदा हर्जाना देने के लिए तैयार हूँ। लेकिन कुछ दिनों के बाद उसने बैंक से भी 2500 रूपेय निकाल लिये क्योंकि उसे मेरा पिन कोड मालुम था। फिर मैं चुप न बैटी मेरे घरवालों ने कहा उस पर कानूनी कार्यवाही की जाए जिससे कि सारा सच सामने आ जाएगा। फिर मैने बैंक मैनेजर व अपने सर से बात करी तो मैनेजर सर ने कहा आप पहले पुलिस में रिपोर्ट लिखवाएँ और हमारे पास 500 रूपेय जमा कर के ऐ.टी.एम मशीन में विडियो फिल्म देखें जिसमे उस चोर की फोटो आ जाएगी जिसने चोरी की है। तो फिर मैने ऐसा ही किया। अपने घर वालो के साथ और ऑफिस वालों के साथ बैंक में फिल्म देखी और जिस पर मुझे शक था वह सच सभी के सामने आ गया उसमे फोटो मेरी सहेली की आई सभी लोग देखकर हैरान हो गये और उसे ऑफिस से निकाल दिया गया। वह सबकी नज़रो में गिर गई इससे पता चलता है कि दोस्त भी दोस्ती दो तरह से करता है एक दोस्ती निभाता है दूसरा अपने स्वार्थ के लिए दोस्ती करता है।
(मिना)