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बाल श्रमिक

A descriptive note on child labour and how can we contribute in fighting this immoral act committed against children.

बच्चे किसी देश या समाज की महत्वपूर्ण सम्प्ती होते हैं। जिनकी समुचित सुरक्षा पालन-पोषण शिक्षा एंव विकास का दायित्व भी राष्ट्र और समुदाय का होता है, क्योंकि कालांतर में यही बच्चे देश के निर्माण और राष्ट्र के उत्थान के आधार स्तंभ बनते हैं। 14 नवम्बर को प्रति वर्ष बाल दिवस के रूप में बनाया जाता है। और वही बाल मजदूरी की समस्या बढ़ी तेजी से फैल रही है। आज विश्व में लगभग 25 करोड़ बाल श्रमिक हैं। भारत में तो इसकी संख्या 440 लाख से भी अधिक है 30 प्रतिशत खेतिहार बाल मजदूर 30-35 प्रतिशत कारखानो में कार्यरत हैं। शेष भाग पत्थर खदानों चाय की दुकानों ढ़ाबों वह घरेलू कार्यों में लगे हुए हैं। योजनाओं, कल्याण कार्यक्रमों, कानून तथा प्रशासनिक गतिविधियों के होते हुए भी बाल श्रमिक कष्ट और संकट के दौर से गुजर रहे हैं। मालिको के द्वारा कम वेतन में अधिक घंटे तक काम लेकर उनका शोषण किया जाता है और न ही अतिरिक्त वेतन दिया जाता है। 14 वर्ष से कम आयू का कोई बच्चा ठेकेदार के पास करता है तो उसे 8 घंटे काम और वह 500-600 रूपेय माह दिये दाते हैं। 14 वर्ष तक पहुचने से पहले ही इनका स्वास्थय खराब हो जाता है। बाल श्रम को रोकने के लिये आवश्यक है कि 14 वर्ष तक के बच्चों को निशुल्क एंव अनिवार्य शिक्षा दी जाये क्योंकि ऐसा हो जाने पर बच्चों को काम पर जाने से रोक लगेगी। समय आ गया है कि हमारे देष की जनता के लिये कटिबद्ध हो जायें। क्योंकि आज के बच्चे ही भारत का निर्माण करने वाले हैं।

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