आत्मविश्वास
The story of a girl, full of confidence, named kusum. After her father’s death her mother took over all the responsibilities of the household, because of her poor economic conditions she left her schooling. Later with the help of one N.G.O. she was enabled to complete her studies. She started tailoring work to support her studies. Later on, she also shared responsibilities of her mother.
यह घटना सत्य तथ्यों पर आधारित है- कुसुम नाम की लड़की के पिता नहीं थे वह कुछ करना चाहती थी। लेकिन घर की परिस्थिति इतनी खराब थी कि वह कुछ कर नहीं सकती थी। यहाँ तक कि वह प्राईमरी स्कूल तक पढ़ाई समाप्त कर घर पर बैठ गई माँ के ऊपर चार बच्चों का बोझ पहले से ही था, वह दिन भर मेहनत करके रात को बच्चों के साथ खुश रहती थी। 2001 में चैतनालय के सम्पर्क में आने के बाद उसे दुबारा पढ़ने के लिए प्रेरित किया गया और उसकी माँ को समझा कर कुसुम को स्कूल में दाखिला दिलाया और उसे स्कूल से निःशुल्क शिक्षा मिली। पढ़ाई के साथ उसे सिलाई की रूचि हुई। उसने पढ़ाई का खर्चा पूरा करने के लिए सिलाई का काम शुरू कर दिया। मेहनत करना व्यक्ति का फर्ज और फल देना ईशवर के हाथ में था। इसी कहावत को सिद्द कर दिया कुसुम ने। आज वह लड़की दसवीं कक्षा ओपन से पास करके इसके साथ पेंटिंग का कोर्स प्राप्त करके दूसरों को प्रशिक्षण दे रही है उसका आत्मविश्वास इतना मजबूत है कि वह दूसरों को अपने पैरों पर खडा़ होने के लिए प्रेरणा देती है कि मेहनत करना जरूरी है। अभी वह जिन्दगी में और कुछ करना चाहती है। अपनी माँ का सहारा बनना चाहती है परन्तु समाज के लोग उसे अकेला जीने नहीं देते। परिवार के लोग भी उस पर अंगुलियां उठाते हैं। परन्तु वह लड़की (कुसुम) अभी भी माँ को स्पष्ट और साफ कहती है। मेरे को अपने बहन भाईयों को सहारा देना है और उन्हें भी अपने पैरों पर खडा़ कराना है। वह हर प्रकार के सांस्कृतिक व धार्मिक प्रोग्राम में भाग लेती है।