दहेज प्रथा - 1
यह कहानी आगरा की है। वहाँ पर एक लड़की रहती थी जिसका नाम पायल था और उसके माँ-बाप गरीब थे। वह अपने माँ-बाप की अकेली लड़की थी जिसकी उम्र 20 साल थी। उसके माँ-बाप ने उसकी शादी के दिन दुलहापक्ष को 50 हजार रूपये दहेज में दिए। दुलहा-दुलहन मंडप पर बैठे थे कि तभी लड़के के बाप ने कहा कि स्कूटर कहाँ है हमें स्कूटर और 50 हजार रूपेय दहेज में दो वरना यह शादी नही होगी।
यह कहानी आगरा की है। वहाँ पर एक लड़की रहती थी जिसका नाम पायल था और उसके माँ-बाप गरीब थे। वह अपने माँ-बाप की अकेली लड़की थी जिसकी उम्र 20 साल थी। उसके माँ-बाप ने उसकी शादी के दिन दुलहापक्ष को 50 हजार रूपये दहेज में दिए। दुलहा-दुलहन मंडप पर बैठे थे कि तभी लड़के के बाप ने कहा कि स्कूटर कहाँ है हमें स्कूटर और 50 हजार रूपेय दहेज में दो वरना यह शादी नही होगी। तब पायल के पिताजी ने कहा कि मैँ पांच,छः महिने तक आप को पैसा दे दुंगा लेकिन तभी लड़का मंडप से उठ जाता है और कहता है मुझे स्कूटर चाहिए तभी में शादी करूंगा यह सुन कर लड़की खड़ी होती है और कहती है मैं यह शादी नहीं करूंगी और लड़के और उसके बाप को भगा देती है। अपने बाप से कहती है कि पिताजी आप के लिए मैं लड़का हूँ और जिससे शादी करूंगी बिना दहेज के करूंगी इसके लिए वह खूब पढ़ाई करती है और वह डॉक्टर बन जाती है। अपनी शादी वह अपनी मर्जी से करती है। उसकी शादी एक डॉक्टर से होती है जो कि बहुत अमीर और खूबसूरत था और पायल को बहुत ही पसंद करता था। अगर हमारे समाज में ऐसी लड़कीयाँ रहेंगी जो कि दहेज के खीलाफ खड़ी होंगी तो दहेज जैसी बुराई जड़ से खत्म हो जाएगी।
(बबीता)