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You are here: Home कहानियाँ (Stories) नई दिल्ली (New Delhi) महिलाऐं एवं बच्चे दूसरे विवाह पर रोक

दूसरे विवाह पर रोक

A story of a woman, who after becoming widow tried to be self-dependent. She was mentally tortured by her in - laws because they never wanted her to work. Later one boy came and asked her in - laws for her remarriage, which they refused. But then that women gathered her courage to stand against her people and she got remarried with that boy.

यह कहानी खानपुर जे.जे. कालोनी में रह रही एक औरत की है। जिसके पति की अचानक सड़क दुर्घटना में मौत हो जाने पर उसका घर में रहना दुर्भऱ हो गया। शादी के बाद उसे पता नहीं था कि ये सुखमय जीवन केवल दो साल का है। दोनों पति-पत्नी अन्दर जा रहे थे कि अचानक सड़क पर ट्रक के साथ दोनो पति-पत्नी का एक्सीडैंट हो गया। कुछ दिन बाद पत्नी की हालत तो ठीक हो गई पर उसे अपने पति से हाथ धोना पडा़ उसने 5-6 महिने बाद अपने हौसले को मजबूत किया और नौकरी करने की सोची। यह बात जब उसके सास-ससुर को पता चली तो उन्होने नौकरी के लिए साफ मना कर दिया। लेकिन उसने ठान रखा था कि उसे अपने पैरों पर खडा़ होना है और उसने घर वालों की परवाह न करते हुए एक स्कूल में नौकरी की और अपना खर्च चलाने लगी। उस औरत की बेबसी और लाचारी को पड़ोस का एक लड़का शुरू से देख रहा था। जब तक पति था तो उसे सिर आंखों पर बिठाया जाता था लेकिन पति न होने पर देवर के ताने, नन्द के ताने और सास-ससुर का अपमान सहते रहना उसका जीवन बन गया था। लेकिन पड़ोस का एक  लड़का शुरू से यह सब देख रहा था उसे डर था कि यह औरत परेशान हो कर कुछ गलत कदम न उठा लें। उसने उसके सास-ससुर को उसकी दूसरी शादी करने की सलाह दी लेकिन सास-ससुर ने कहा कि हमारे यहां दूसरी शादी का प्रचलन नही है। अब वह निराश होकर अपने घर चला गया फिर दूसरे दिन उसने उस औरत से बात की और औरत ने कहा कि अब कौन लड़का मुझ विधवा से शादी करेगा तो उस लड़के ने कुछ सोचे बिना कहा कि मैं तुमसे शादी करूंगा। कुछ दिन सोचने के पश्चात उसने अपने सास से बात की, परन्तु उनके व्दा्रा उसे जलील करने और मंजूरी न मिलने के पश्चात उसने अपनी मां से इस विष्य पर बात की, उनकी भी नामंजूरी पाकर वह अत्यंत दुखी हुई। और उसने आत्महत्या करने की कोशिश की लेकिन पड़ोस की एक स्त्री व्दारा समझाए जाने पर कि तुम्हें अपनी जिंदगी का निर्णय खुद करना चाहिए क्योंकि तुम्हारी जिंदगी की बेहतरी के बारे में तुम से अधिक कोई नहीं जानता। इस प्रकार उसने उस लड़के के साथ विवाह करने का निर्णय लिया और एक मंदिर में भगवान को साक्षी मानकर शादी कर ली अब वह अपने इस निर्णय से खुश हैं।

 

 


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