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You are here: Home कहानियाँ (Stories) नई दिल्ली (New Delhi) महिलाऐं एवं बच्चे पिता का प्यार या फिर बेटी पर ही अत्याचार।

पिता का प्यार या फिर बेटी पर ही अत्याचार।

A story of a girl whose father had raped her. Now two questions which are being raised through this story, those are 1. Whether society will support her father or that girl? 2. Whether this society is going to accept that girl or not?

यह ख़बर, सन् 2002 की एक ऐसी घटना है जिसको सुनते ही दिल दहल जाता है। जहाँ एक  पिता अपनी बेटी को पिता का प्यार देता है और उसके लिये तरह-तरह के सपने संजोता है, उसको दुल्हन के रूप में देखना चाहता है वहीं कुछ ऐसे भी पिता होते हैं जो कि अपनी ही बेटीयों को किसी दूसरी निगाहों से देखते हैं जिस तरह एक किसान अपनी फसल पकने का इन्तजार करता है उसी तरह इस पिता ने भी ऐसा ही एक काम किया जिसकी चार बेटीयाँ हैं। उसकी दूसरी बेटी जिसकी उम्र 11 वर्ष है वह उसको अपनी सम्पत्ति समझकर इस्तेमाल करता रहा, जब हमें दूसरी बेटी की जानकारी मिली जिसकी खबर किसी को भी नही थी तो हमने जाकर उसे उसके पिता के कहर से बचाया । हमारा समाज ऐसे लोगों को किस निगाह से देखेगा? जहाँ बेटी अपने आप को सबसे ज्यादा सुरक्षित समझती है आज बेटियाँ सबसे ज्यादा वहीं असुरक्षित महसूस करती है। क्या समाज ऐसे लोगों का साथ देगा या फिर उस लड़की का जिस पर अत्याचार हुआ है। क्या अब उस लड़की को जिसके पिता ने उसे अपनी हवस का शिकार बनाया उसे समाज अपनाएगा।


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