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लिंग भेदभाव

The story of a family where parents were practising gender discrimination but later, they learnt a lesson from this.

शाहबाद डेरी, दिल्ली में एक छोटा सा परिवार था जिसमें एक पति-पत्नी अपने दो बच्चों के साथ रहते थे। वह दोंनों अपने लड़के को इतना प्यार करते थे की उसका अंदाजा भी नहीं लगा सकते। वह अपने लड़के को तो स्कूल भेजते थे उसे बहुत सा पैसा देते थे मगर लड़की के साथ वह यह सब नहीं करते थे। वह कहते थे कि लड़के तो खानदान का चिराग हैं। लड़कियाँ तो दूसरे के घर चली जायेंगी कौन सा हमारे साथ जिंदगी भर रहेंगी और फिर इसे पढ़ा-लिखा कर कौन सा इंजिनियर बनाना है। दूसरे के घर जाकर भी चुल्हा फूँकना है। इस कारण उसे वह दिन भर काम में लगा कर रखते थे और उसे कहीं पर नही जाने देते थे कहते थे कि इधर-उधर जायेगी तो बिगड़ जायेगी।

जब लड़की की शादी हो गई तो वह अपने ससुराल चली गई उसके दो साल के बाद लड़के की भी शादी हो गई। शादी के तीन महीने बाद ही सास बहू में लड़ाई होनी शुरू हो गई और बेटे से भी मनमुटाव हो गया। बेटे ने अपने माँ-बाप से अलग रहना शुरू कर दिया। फिर जब उनकी बेटी उन्हे लिवाने आई तो उन्हें यह एहसास हुआ की लड़की को हमने क्या नही कहा उसके साथ कितना बुरा किया फिर भी वह हमें अपने साथ लिवाने चली आई। वह मन ही मन सोचने लगी काश मैने अपने बेटे को इतना सर नही चढ़ाया होता। हमारे समाज में अभी भी बहुत सारे परिवारों में लिंग-भेद होता है उनके मन से भी यह भेदभाव हटाना चाहिये।


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